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राफेल घोटाले के सवाल पर रक्षा मंत्री सीतारमण ने लहराया खाली कागज़, देश को बनाया बेवकूफ, संसद में बोला झूठ!

राफेल विमान मामला एक बार फिर से सुर्ख़ियों में बना हुआ है। संसद के मॉनसून सत्र में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने मोदी सरकार पर राफेल विमान की डील में घोटाला करने का आरोप लगाया।

यूं तो मोदी सरकार यूपीए सरकार के सभी कामों को गलत बताती है। लेकिन राहुल गाँधी के जवाब में डील में घोटाला होने की आशंका के तमाम सवालों को पीछे छोड़ते हुए रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक कागज़ हिलाते हुए कहा कि यूपीए सरकार के समझौते के कारण हम विमान की कीमत नहीं बता सकते हैं।

रक्षा मंत्री ने कहा कि यूपीए सरकार ने 2008 में फ़्रांस के साथ एक सीक्रेसी क्लॉज पर हस्ताक्षर किये थे। इसके मुताबिक, डील की जानकारी सार्वजानिक नहीं की जाएगी। मेरे हाथ में उसी समझौते की कॉपी है। लेकिन क्या सीतारमण ने एक कागज़ से 100 करोड़ से ज़्यादा जनता को बेवकूफ बनाया है? लेकिन उस से पहले जानते हैं कि आरोप क्या है।

क्या है राफेल घोटाला

राफेल एक लड़ाकू विमान है। इस विमान को भारत फ्रांस से खरीद रहा है। कांग्रेस ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि मोदी सरकार ने विमान महंगी कीमत पर खरीदा है जबकि सरकार का कहना है कि यही सही कीमत है। ये भी आरोप लगाया जा रहा है कि इस डील में सरकार ने उद्योगपति अनिल अम्बानी को फायदा पहुँचाया है।

बता दें, कि इस डील की शुरुआत यूपीए शासनकाल में हुई थी। कांग्रेस का कहना है कि यूपीए सरकार में 12 दिसंबर, 2012 को 126 राफेल राफेल विमानों को 10.2 अरब अमेरिकी डॉलर (तब के 54 हज़ार करोड़ रुपये) में खरीदने का फैसला लिया गया था। इस डील में एक विमान की कीमत 526 करोड़ थी।

इनमें से 18 विमान तैयार स्थिति में मिलने थे और 108 को भारत की सरकारी कंपनी, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), फ्रांस की कंपनी ‘डासौल्ट’ के साथ मिलकर बनाती। 2015 में मोदी सरकार ने इस डील को रद्द कर इसी जहाज़ को खरीदने के लिए 2016 में नई डील की।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नई डील में एक विमान की कीमत लगभग 1670 करोड़ रुपये होगी और केवल 36 विमान ही खरीदें जाएंगें। नई डील में अब जहाज़ एचएएल की जगह उद्योगपति अनिल अम्बानी की कंपनी बनाएगी। साथ ही टेक्नोलॉजी ट्रान्सफर भी नहीं होगा जबकि पिछली डील में टेक्नोलॉजी भी ट्रान्सफर की जा रही थी।

अब मोदी सरकार का कहना है कि वो विमान कितने रुपये में खरीदा गया है इस बात को नहीं बता सकती है क्योंकि इस से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा होगा। अब सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के आलावा सीक्रेसी क्लॉज का भी बहाना बना रही है।

रद्द हो चुके समझौते का दिया हवाला

रक्षा मंत्री भूल गईं कि जिस समझौते का कागज सदन में लहरा कर वह सरकार को पाकसाफ करने के सूबत के तौर पर दिखा रही हैं, उसी 12 दिसंबर 2012 को तत्कालीन यूपीए सरकार के राफेल खरीद वाले सौदे को मोदी सरकार पहले ही रद्द कर चुकी है।

खरीद रद्द करने का मतलब है सौदा रद्द। ऐसे में जब सौदा ही रद्द हो गया, तो सीक्रेसी क्लॉज को दिखाने का कोई मतलब नहीं रह जाता। यानी कि रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को जो कागज लहराया, वह रद्द हो चुके सौदे का कागज था, जिसका वर्तमान में कोई अस्तित्व ही नहीं है।

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