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एनकाउंटर को फर्जी बताने वाले परिवारों पर गैंगरेप के केस ठोक रही है योगी सरकार! - XtroGuru
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एनकाउंटर को फर्जी बताने वाले परिवारों पर गैंगरेप के केस ठोक रही है योगी सरकार!

19 मार्च, 2017. इसी दिन योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे. बीजेपी सरकार ने कहा, कानून व्यवस्था ठीक करना हमारी वरीयता होगी. आने वाले 12 महीनों में UP के अंदर 1,200 से ज्यादा एनकाउंटर हुए. इनमें 40 अपराधी (कथित) मारे गए. 247 कथित क्रिमिनल घायल भी हुए. इन मुठभेड़ों पर सवाल उठे. आरोप लगे कि पुलिसवाले इनाम के लालच में फर्जी एनकाउंटर्स कर रहे हैं. सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया. कहा कि एनकाउंटर कोई प्लानिंग करके नहीं किया जाता. अपराधियों को पकड़ने की कोशिश करती पुलिस पर जब हमला होता है, तो जवाबी कार्रवाई की जाती है. इस बीच कुछ मारे गए कथित गैंगस्टर्स के परिवारवालों ने पुलिस पर गंभीर इल्जाम लगाए. उनका कहना है कि पुलिस उनके परिवार को फर्जी मामलों में फंसा रही है.

इंडिया टुडे ने इन मुठभेड़ों की तफ्तीश की. सच जानने के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई शहरों में पहुंची. वेस्ट UP इसलिए कि इसके कई शहर गैंगस्टर्स का ठिकाना रहे हैं. इस जांच का पहला पड़ाव था कैराना. म्यूजिक में दिलचस्पी रखने वाले जानते होंगे. कैराना घराना हिंदुस्तानी क्लासिकल का एक मशहूर नाम है. अब ये शहर अंट-शंट वजहों से खबर में आता है. मुजफ्फरनगर दंगों के बाद यहीं से हिंदुओं के सामूहिक पलायन की खबर आई थी. यहां एक भूरा नाम का गांव है. इसमें रहने वाले नौशाद नाम के एक शख्स पर गैंगस्टर्स ऐक्ट लगा था. 2012 में. 29 जुलाई, 2017 को एक कथित एनकाउंटर में नौशाद मारा गया. इस बात को एक साल होने आया, लेकिन नौशाद का परिवार अब भी सहमा हुआ है. उनके मुताबिक, उन्होंने मुठभेड़ को फर्जी बताते हुए उसे चुनौती दी थी. इसके बाद घर के सारे मर्दों पर गैंगरेप का इल्जाम लगाकर मुकदमा दर्ज कर दिया गया.

ये नौशाद की तस्वीर है. परिवार का आरोप है कि एनकाउंटर के खिलाफ शिकायत दर्ज करने के एक दिन बाद ही पुलिस ने परिवार के सारे मर्दों पर गैंगरेप का केस दर्ज कर दिया.

गैंगरेप केस की टाइमिंग
इस गैंगरेप के केस की टाइमिंग गौर करने वाली है. नौशाद का परिवार 3 अगस्त, 2017 को शिकायत दर्ज कराने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) पहुंचा था. उसके अगले ही दिन UP पुलिस उनके घर पहुंची. नौशाद के भाई, चाचा समेत घर के सारे मर्दों के खिलाफ गैंगरेप का केस दर्ज हो गया. इससे जुड़े दस्तावेज इंडिया टुडे के पास मौजूद हैं.

नौशाद के भाई हैं इमाम. उन्होंने कहा:

हमारी गलती इतनी है कि हम गरीब हैं. हमारा घर देखिए. क्या ये किसी बड़े क्रिमिनल का घर लगता है? हमने शिकायत दर्ज कराई. इसी वजह से पुलिस हमें परेशान कर रही है. हम पर गैंग रेप का इल्जाम लगाया गया है. पुलिस हमारे पूरे परिवार को ही अपराधियों के तौर पर पेश कर रही है. वो शिकायत वापस लेने के लिए अधिकारियों को हमारे घर भेजते रहते हैं. अगर कोई मदद नहीं मिली, तो वो लोग जिस पर कहेंगे, हमें हर उस दस्तावेज पर अंगूठा लगाने के लिए मजबूर कर दिया जाएगा.

ये सरवर है. सरवर और नौशाद, दोनों के परिवारवालों ने राष्ट्रीय मानवाधिकार में शिकायत की. परिवार का कहना है कि नौशाद और सरवर, दोनों को लग रहा था कि उन्हें मारा जा सकता है.

नौशाद और सरवर का डर सही साबित हुआ!
नौशाद और उसके दोस्त सरवर को पहले से लग रहा था कि उन्हें मार दिया जाएगा. कथित एनकाउंटर से कुछ दिन पहले का एक ऑडियो क्लिप है. इसमें नौशाद और सरवर आपस में बहस कर रहे हैं. ऑडियो में सरवर नौशाद से कह रहा है कि सरेंडर कर दो. ये भी कह रहा है कि अगर सरेंडर नहीं किया, तो दोनों मारे जाएंगे. ऑडियो में सरवर ये भी कह रहा है कि नौशाद ईद के बाद सरेंडर करने के लिए राजी हो गया है. एनकाउंटर के बाद ये ऑडियो कैराना में खूब वायरल हुआ.

ये नौशाद के परिवार के खिलाफ दर्ज एफआईआर की कॉपी है. इसका दूसरा पन्ना नीचे है. गैंगरेप का जो आरोप लगाया गया है, उसकी टाइमिंग देखकर सवाल तो उठते हैं.
नौशाद के परिवार का कहना है कि एनकाउंटर पर सवाल उठाने की वजह से उन्हें झूठे मामले में फंसाया जा रहा है. परिवार का ये भी कहना है कि पुलिस उनके ऊपर शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बना रही है.

‘पुलिस की मुखबिर आई और झांस देकर साथ ले गई’
सरवर का परिवार सामने नहीं आ रहा है. सरवर के परिवार के मर्दों पर भी गैंगरेप का केस दर्ज हुआ है. ये सब NHRC में शिकायत दर्ज होने के बाद हुआ. नौशाद के अब्बू जमील और सरवर के रिश्तेदार वसील की तरफ से NHRC में एक हलफनामा दाखिल किया गया था. इसके मुताबिक 28 जुलाई, 2017 को UP पुलिस की एक महिला मुखबिर नौशाद और सरवर को झांसा देकर अपने घर ले गई. जब दोनों काफी देर तक नहीं लौटे, तो परिवारवालों ने उसी दिन रात को पुलिस से संपर्क किया. अगली सुबह स्थानीय लोगों से पता चला कि नौशाद और सरवर मुठभेड़ में मारे गए. पुलिस उनकी लाशों को साथ ले गई थी. परिवारवालों का ये भी कहना है कि कथित महिला मुखबिर के घर के बाहर बहुत सारा खून फैला हुआ था.

 

 

ये सुमित की फोटो है. परिवार का कहना है कि सुमित नाम के किसी और शख्स के खिलाफ मामला दर्ज था, लेकिन पुलिस ने उनके सुमित को उठा लिया. बाद में पुलिसवालों ने उसे रिहा करने के बदले रुपये मांगे.

‘कार चलाना नहीं आता था, तो कार चलाकर कैसे भागा’
कैराना के इस भूरा गांव के बाद इंडिया टुडे बागपत पहुंचा. यहां एक गांव है- चिरचिता. यहां सुमित नाम का एक किसान मुठभेड़ में मारा गया था. पुलिस का कहना था कि सुमित नोएडा में एक कार के अंदर जा रहा था, जब पुलिस ने उसका पीछा किया. इसी दौरान एनकाउंटर में उसकी मौत हो गई. सुमित के परिवारवाले पुलिस के दावे को खारिज करते हैं. सुमित के पिता हैं करम सिंह. उनका कहना है कि सुमित को फंसाया गया. किसी और सुमित नाम के शख्स के खिलाफ मुकदमा दर्ज था. उस सुमित की जगह पुलिस इस सुमित को उठा ले गई और इसे फ्रेम कर दिया. करम सिंह का कहना है कि सुमित को कार चलाना ही नहीं आता था. फिर वो कार चलाकर भागा कैसे? उनका कहना है कि पुलिस ने लोकल बाजार से सुमित को उठाया और फिर एनकाउंटर में उसे मार दिया. जब सुमित के परिवार ने एनकाउंटर पर सवाल उठाए, तो उसके भाई और दो चचेरे भाइयों पर गैंगरेप का केस दर्ज कर दिया गया.

करम सिंह ने बताया:

उन्होंने (UP पुलिस) मेरे बेटे को कत्ल करने से पहले उसे बहुत सताया. यातनाएं दी. जब पुलिसवालों को महसूस हुआ कि वो गलत सुमित को उठा लाए हैं, तो उन्होंने एक मुखबिर के हाथों हमें संदेश भिजवाया. साढ़े तीन लाख रुपये मांगे हमसे. अगले दिन हम पैसे लेकर नोएडा थाने पहुंचे. हमसे कहा गया कि केस बहुत आगे पहुंच गया है. उसी शाम को हमें बताया गया कि सुमित मुठभेड़ में मारा गया. उन्होंने फिर एक कहानी गढ़ी. स्थानीय बीजेपी नेता ने हमारी मदद करने की कोशिश की, लेकिन वो भी ज्यादा कुछ नहीं कर सके. हमें इंसाफ चाहिए. इस हत्या के लिए जो भी दोषी हैं, उन्हें सजा दिलवाने के लिए मैं किसी भी हद तक जाऊंगा. पुलिस चाहती है कि हम शिकायत वापस ले लें. इसीलिए उन्होंने हमारे लड़कों पर झूठे मुकदमे दर्ज किए हैं.

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