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सोनिया गाँधी के एक कॉल से भाजपा हुई चारो खाने चित ,17 मई को सरकार…

गोवा और मणिपुर में भाजपा से ज्यादा सीटें पाने के बावजूद सरकार बनाने में विफल रहने वाली कांग्रेस ने कर्नाटक में सरकार बनाने की कोशिश करने के लिए नतीजे आने का तक का इंतजार नहीं किया. यही वजह थी कि जब कांग्रेस और जनता दल (एस) के नेता राज्यपाल से मिलने पहुंचे तो उन्होंने मिलने से मना कर दिया.यहीं से कर्नाटक की राजनीति में एक के बाद एक नाटकीय मोड़ आने शुरू हुए.

सोनिया ने यह बात राहुल गांधी से लेकर बंगलूरू पहुंचे गुलाम नबी आजाद और अशोक गहलोत से साझा की. सवा दो बजे कांग्रेस नेताओं ने कुमारस्वामी से बात कर समझौते पर मुहर लगवा ली. पौने तीन बजे कांग्रेस नेता राजभवन जाने के लिए निकल गए. ताकि गोवा और मणिपुर जैसा स्थिति का सामना न करना पड़े. इन दोनों राज्यों में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी थी. लेकिन भाजपा ने रातोंरात दूसरी पार्टियों से गठबंधन कर सरकार बना ली और कांग्रेस को विपक्ष में बैठने को मजबूर कर दिया.

यही वजह थी कि इस बार कांग्रेस की ओर से जोड़तोड़ करने और सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए नतीजे आने का इंतजार ही नहीं किया गया. लेकिन कांग्रेस नेताओं को राजभवन के गेट पर ही रोक दिया गया क्योंकि राज्यपाल वजुभाई बाला का कहना था कि सरकार बनाने का दावा तो चुनाव के नतीजे आने के बाद ही किया जा सकता है.

हालांकि कुछ समय बाद इस्तीफा देने पहुंचे मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से उन्होंने मुलाकात की. लेकिन जैसे ही यह बात भाजपा नेताओं को पता चली, उन्होंने भी सरकार बनाने का दावा पेश करने का फैसला कर लिया. शाम छह बजे पहले भाजपा नेताओं और फिर कुछ ही समय बाद कांग्रेस और जद (एस) नेताओं से मिलकर राज्यपाल ने दोनों के दावे स्वीकार किए और कानून के जानकारों व संविधान विशेषज्ञों से सलाह कर फैसला करने की बात कही.

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