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उस केस में फैसला आ गया है जिसमें हिंदुस्तान की सबसे बड़ी अदालत को पूरी रात जागना पड़ा

देश के संसदीय इतिहास में सबसे अद्भुत सुनवाइयों में से एक पूरी हो गई है.

येदिुरप्पा को कर्नाटक राज्यपाल वजुभाई वाला की ओर से सरकार बनाने का न्योता मिला. येदियुरप्पा ने ऐलान कर दिया कि वो आज सुबह साढ़े नौ बजे शपथ ले डालेंगे. लेकिन कांग्रेस-जेडीएस ने इस न्योते को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी. और कोर्ट ने अभूतपूर्व फैसला लेते हुए 3 जजों की बेंच बनाकर रात के पौने दो बजे सुनवाई शुरु कर दी. अब फैसला आ गया है.

सुबह साढ़ चार बजे कोर्ट ने मौखिक रूप से कह दिया था कि वो येदियुरप्पा के शपथग्रहण पर रोक नहीं लगाएगा. कोर्ट ने अपना आदेश जारी करते हुए इस बात को कायम रखा. अगली सुनवाई 18 मई को सुबह 10 बजे होगी. इसका मतलब येदियुरप्पा आज शपथ लेंगे और कर्नाटक के मुख्यमंत्री हो जाएंगे. कल की सुनवाई में दोनों पक्षों को गवर्नर को दी उन चिट्ठियों को पेश करना है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि उनके पास सरकार बनाने लायक विधायक हैं.

कोर्ट ने साफ किया कि यदि येदियुरप्पा के सीएम बनने में किसी तरह की कोई कानूनी खामी पाई जाती है, तो कोर्ट शपथग्रहण को खारिज कर देगा. कोर्ट ने फिलहाल बहुमत साबित करने के लिए येदियुरप्पा को मिले 15 दिन के समय पर राय नहीं रखी है.

सुप्रीम कोर्ट के मौखिक आदेश के बाद ऐसी खबरें आईं कि फैसला सुबह पांच बजे आ जाएगा. जजों ने मंत्रणा भी शुरू कर दी थी. लेकिन कांग्रेस-जेडीएस के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलीलें जारी रखीं. इसके बाद सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल मुकुल रोहतगी ने भी दलीलें शुरू कर दीं. इसलिए फैसला सुबह पांच बजे भी नहीं आ पाया.

राज्यों के गवर्नर कोर्ट के प्रति जवाबदेह नहीं होते. इसलिए वजुभाई वाला को मामले में पक्ष नहीं बनाया गया. कोर्ट ने ये भी कहा था कि वो अंतिम फैसला देने से पहले दूसरे पक्ष (भाजपा) को सुनना चाहती है. अदालत में मौजूद सॉलिसिटर जनरल और उनकी टीम ने कहा था कि वो भारत सरकार (गवर्नर एक संवैधानिक पद है, कार्यपालिका का हिस्सा) का पक्ष रख रहे हैं.

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