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गोलीबारी करते जिस शख्स को दलित दंगाई बताया गया वो गैरदलित निकला, मीडिया का एक और झूठ पकड़ा गया

SC/ST एक्ट में सुप्रीम कोर्ट द्वारा किए गए बदलाव के विरोध में दलित संगठनों द्वारा 2 अप्रैल को ‘भारत बंद’ का आह्वान किया गया। भारत बंद के दौरान लाखों की संख्या में दलित समाज के लोग सड़कों पर उतरे। आंदोलन के वक्त जो हिंसा हुई उसके लिए मीडिया ने दलित युवाओं को बिना किसी जांच के जिम्मेदार ठहरा दिया।

अब जांच हो रही है तो पता चल रहा है कि हिंसा करने वाले दलित नहीं सवर्ण थे, जो दलितों के आंदोलन को बदनाम करने लिए और उनपर गोली चलाने के लिए सड़कों पर उतरे थे। दो अप्रैल के ‘भारत बंद’ आंदोलन के बाद से ही सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रही है, इस वीडियो में एक युवक बड़ी बंदूक से गोली चलाता हुआ नजर आ रही है। युवक बीच सड़क पर अपने साथियों के साथ गोली चलाते हुए आगे बढ़ रहा है।

मीडिया और सोशल मीडिया में इस युवक को दलित बताकर आंदोलन को कोसा गया। लेकिन अब पुलिस ने इस युवक का पहचान उजागर कर दिया है। वीडियो मध्य प्रदेश के ग्वालियर की है, युवक का नाम महेंद्र चौहान है। जो दलित नहीं सवर्ण है। महेंद्र चौहान ग्वालियर जिले के थाटीपुर क्षेत्र का रहने वाला है। पुलिस ने इसके खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। पुलिस ने बीती रात उसके घर पर दबिश भी दी लेकिन वह नहीं मिला। पुलिस ने पूछताछ के लिए उसके भाई को थाने में बैठाया है।

मध्य प्रदेश के सामाजिक कार्यकर्ता और आरटीआई एक्टिविस्ट आनंद कुमार ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है। उन्होंने लिखा है कि ‘ग्वालियर ब्रेकिंग
-थाटीपुर इलाके में लाइव गोली फायरिंग
-हुड़दंड में चला रहा युवक बंदूक से फायरिंग
-युवक का नाम महेंद्र चौहान थाटीपुर क्षेत्र निवासी, पुलिस ने की नामजद FIR’

वही इस मामले में दलित एक्टिविस्ट देवाशीष ने लिखा है कि ‘ये व्यक्ति जो दलित प्रदर्शनकारियों पर गोली चला रहा है इसका नाम है महेंद्र चौहान। बॉबी तोमर, राजा चौहान के बाद 1 और भाजपाई पर मुकदमा दर्ज हुआ है। ये सब वीडियो में गोली चलाते दिखाई दे रहे है। अब समझ लीजिए कि भाजपा केवल मुहजुबानी दलित समर्थन करती है असलियत में तो वो उन्हें मरवा रह है।

बता दें कि आंदोलन के तुरंत बाद देवाशीष ने हिंसा करने वाले राजा चौहान का नाम उजागर किया था। राजा चौहान भी मध्य प्रदेश का रहने वाला है। वो दो अप्रैल के आंदोलन के दौरान दलितों पर गोली चला रहा था। पहले मीडिया राजा चौहान को भी दलित बता कर आंदोलन को दुष्प्रचारित कर रही थी, लेकिन देवाशीष के खुलासे के बाद इस प्रकार के दुष्प्रचार में थोड़ी कमी आयी।

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