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जानिए क‍िस ग्रह के खराब होने से सताने लगता है अनहोनी का डर, कैसे करते हैं ठीक - XtroGuru
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जानिए क‍िस ग्रह के खराब होने से सताने लगता है अनहोनी का डर, कैसे करते हैं ठीक

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक ऐसा चंद्रमा के राहु, केतु या शनि के साथ होने से होता है। ऐसा होने पर व्यक्ति नकारात्मक विचारों से घिर जाता है और उसे अनहोनी का डर सताने लगता है।

डर जीवन में हर किसी को लगता है, कई बार दिमाग में हर वक्त किसी बात का डर बना ही रहता है। किसी विशेष प्रकार के डर को, विशेष फोबिया के नाम से जाना जाता है, आप भी जानें डर के यह 7 प्रकार कहीं आपको तो नहीं ?

1 मायसोफोबिया -यानि कीटाणु का डर, किसी भी चीज को खाने, छूने या किसी कार्य को करते वक्त कुछ लोगों को कीटाणु के संक्रमण का डर बना रहता है और यह बात पूरे समय उनके दिमाग में होती है, जिसके कारण वे सफाई में लगे रहते हैं, इसे वैज्ञानिक और चिकित्सकीय भाषा में मायसोफोबिया कहते हैं।

2 आर्कनो फोबिया – अगर आप भी उन लोगों में शामिल हैं, जो मकड़ी को देखते ही चींखने-चिल्लाने या भागने लगते हैं, तो आप भी इस फोबिया के शिकार हैं। मकड़ी से डर लगना आर्कनो फोबिया कहलाता है।

3 नैक्टो फोबिया – यह डर का वह प्रकार है, जो सामान्य रूप से ज्यादातर लोगों में देखा जाता है। अंधेरे से लगने वाले डर को नैक्टो फोबिया कहा जाता है।

4 एयरो फोबिया – एयरोफोबिया, डर का वह प्रकार है जिसमें व्यक्ति को उड़ने या अधिक ऊंचाई पर होने से डर लगता है। अगर आप भी ऊंचाई वाले स्थान पर या फिर हवाई जहाज में डरते हैं, तो आप इसके शिकार हैं।

5 पेनो फोबिया – पेनो फोबिया किसी अंजान चीज, बात, घटना आदि का वह डर है, जिसके घटित होने की संभावना नहीं होती लेकिन अनहोनी का डर बना रहता है।

6 एस्ट्रा फोबिया – तेज आंधी चलने, बादल के जोर-जोर से गरजने या बिजली चमकने की स्थिति में कई बार मन में एक डर पैदा हो जाता है जिसे एस्ट्रा फोबिया कहते हैं।

7 सोमनीफोबिया – यह डर का वह प्रकार है, जिसमें व्यक्ति ज्यादातर समय इस बात को लेकर आशंकित रहता है कि कहीं उसे नींद न आ जाए।

हम सबके जीवन में कई बार ऐसी स्थितियां पैदा होती हैं जब हमें किसी अनहोनी की डर सताने लगता है। ऐसी स्थिति में हम खुद को काफी बेचैन पाते हैं और ऐसा लगता है जैसे हमारे साथ कुछ बुरा होने वाला है।

क्या आप जानते हैं कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह कुंडली में ग्रह की दशा खराब होने से होता है। जी हां, जब भी चंद्रमा के योग पर अंधेरा गहराता है तब ऐसी स्थितियां उत्पन्न होती हैं। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, ऐसा चंद्रमा के राहु, केतु या शनि के साथ होने से होता है।

ऐसा होने पर व्यक्ति नकारात्मक विचारों से घिर जाता है और उसे अनहोनी का डर सताने लगता है। कहते हैं कि इस डर की स्थिति में लंबे समय तक रहना ठीक नहीं होता। इससे व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार पड़ सकता है। चलिए जानते हैं कि इससे बचने के लिए किस तरह के उपाय किए जाते हैं।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस डर की स्थिति को खत्म करने के लिए व्यक्ति को अपनी कुंडली में चंद्रमा की दशा व दिशा को मजबूत करना चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि दोनों हाथ को जल्दी-जल्दी रगड़ने से व्यक्ति के अंदर साहस का संचार होता है।

इसलिए अनहोनी का डर सताने पर दोनों हाथ को रगड़कर अपने चेहरे के ऊपर घुमाने की सलाह दी जाती है। बताते हैं कि ऐसा करने से आपके अंदर हिम्मत आती है और आपका चंद्रमा मजबूत होता है।

इसके अलावा कुंडली में चंद्रमा की दशा की मजबूत करने से लिए पूर्णमासी के दिन खीर बनाने की बात कही जाती है। इसके बाद इस खीर को चंद्रमा को रोशनी रख देना चाहिए और सुबह में इसका सेवन करना चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि यह करने से जीवन में सकारात्मकता आती है और व्यक्ति का चंद्रमा मजबूत होता है।

एक अन्य प्रचलित उपाय के मुताबिक ऐसे लोगों को अपने अंगूठे में चांदी का छल्ला धारण करना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से साहस आता है और कुंडली में चंद्रमा मजबूत होता है।

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